राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आईपीएस पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ अवमानना के दोषी करार

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आईपीएस पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ अवमानना के दोषी करार

IPS Pushpendra Singh Rathore Held Guilty of Contempt

IPS Pushpendra Singh Rathore Held Guilty of Contempt

जयपुर: IPS Pushpendra Singh Rathore Held Guilty of Contempt, राजस्थान पुलिस महकमे से जुड़ी बड़ी अपडेट मिली है। मामला IPS पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ से जुड़ा है। दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट ने आईपीएस अधिकारी और एसीबी के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ को अवमानना का दोषी माना है। अदालत ने उन्हें सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 6 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के के निर्देश दिए हैं। यह आदेश जस्टिस प्रवीर भटनागर की अदालत ने रवि मीणा की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।


कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। साथ ही कहा कि केवल वॉट्सएप पर नोटिस भेजने के बाद आरोपी को गिरफ्तार करना विधि सम्मत प्रक्रिया नहीं है। अदालत ने इस कार्रवाई को अवैध मानते हुए संबंधित अधिकारी को तलब किया है। वर्तमान में पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ सिरोही जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर कार्यरत हैं।

पुलिस पर गलत गिरफ्तारी के लगे आरोप
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने अदालत को बताया कि आरएसएलडीसी में हुए कथित घूसकांड के मामले में एसीबी ने उनके मुवक्किल को 1 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया था। इससे पहले जांच अधिकारी ने 25 जनवरी 2023 को वॉट्सएप के माध्यम से नोटिस भेजकर 31 जनवरी को पेश होने के लिए कहा था। याचिकाकर्ता ने नोटिस का जवाब देते हुए पत्नी की बीमारी का हवाला देकर पेश होने के लिए समय मांगा था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने बिना वैधानिक (कानूनी) प्रक्रिया अपनाए सीधे गिरफ्तारी कर ली।


याचिका में कहा गया कि यह कार्रवाई दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41-ए का उल्लंघन है, जिसमें गिरफ्तारी से पहले नोटिस देकर जवाब और सहयोग का अवसर देना आवश्यक होता है। ऐसे में एसीबी की कार्रवाई न केवल कानून के विरुद्ध है, बल्कि अदालत की अवमानना भी है।

कोर्ट ने एसीबी की गिरफ्तारी की कार्रवाई को गलत माना
वहीं एसीबी की ओर से अदालत में जवाब पेश कर कहा गया कि आरोपी को नोटिस दिया गया था, लेकिन उसने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और पेश होने से बचता रहा। साथ ही यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता पहले एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा चुका है, जहां उसे राहत नहीं मिली। इसके बाद जांच एजेंसी पर दबाव बनाने के उद्देश्य से अवमानना याचिका दायर की गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने एसीबी की गिरफ्तारी की कार्रवाई को गलत मानते हुए संबंधित अधिकारी को सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए तलब किया है। अदालत अब इस मामले में अगली सुनवाई 6 अप्रैल को करेगी।